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मां -04-Oct-2025

                      मां 

मां बस एक शब्द नहीं पूरी एहसास है मां 
मां है तो ऐसा लगता है कि सारा जग मेरे संग है।

एक मां ही तो अपनी है बाकि तो अपनों के चेहरे में 
गैरों का एक भीड़ है।

मां जिनके कदमों में झुकी सारी दुनियां ज़हान है 
मां मिलीं हैं नसीबों से है कितनी अनमोल मां।

मां के चरणों में स्वर्ग बसा छुपा आंचलों में संसार है 
मां दुनियां की एक  बहुत खूबसूरत  ममता की मूर्त।
है उसकी प्यारी-सी सीरत ।

मां  को  देखा ना  कभी  अपने - पराये में भेद करते 
सदा ही रखा उन्होंने सबको समेटे अपने ह्रदय के 
अंदर।

मां ने ही तो लाया मुझे इस संसार में कष्ट सहकर हजार 
मां न होती तो कभी देख न पाती मैं ये संसार निराली ।

नहीं बनती मेरी पहचान होता न कोई मेरा अस्तित्व 
नहीं मिल पाती मैं कभी - भी अपने - आप से।

दादी ने तो रचीं थी साजीशे हजार 
मुझे मां के गर्भ में ही मारवा ने की थी उनकी एक योजना बेकार ।
 
मां ने मुझे बचाने के लिए लिया मां दुर्गा  का अवतार।
भगवान नहीं आ सकते हर - घर आंगन में इस लिए 
बनाया उन्होंने ने अपना एक स्वरुप भेज दिया हर घर - आंगन में मां का एक रूप।

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